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श्रीराम कथा मे ब्रह्या की स्तुति व भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव का प्रंसंग सुनाया।

सालासर (राजस्थानलिंक.काॅम) - लक्ष्मणगढ रोड़ पर स्थित चमेली देवी अग्रवाल मांगलिक सभागार के पीछे अंजनी माता मंदिर के पास अवधेशानन्द मिशन प्रभु प्रेमी संघ चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सालासर धाम मे चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथावाचक ने वाल्मीकि द्वारा रचित रामचरितमानस के अनेक प्रसंग सुनाए। कथावाचक जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी महाराज ने कथा के दूसरे दिन ब्रह्य की स्तुति व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का पं्रसंग सुनाया। महाराज ने कहा कि ब्रह्न लोक मे ब्रह्यणि ने उत्सव रचा था। ब्रह्या जी ने बता दिया था कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष मे भगवान श्रीराम अयोध्या पंहुचेगें। वाल्मीकि द्वारा चरित रामायण के आधार पर ब्रह्या प्रकट होकर बताने लगे की सम्पूर्ण विश्व मे सम्पूर्ण विश्व मे भगवान श्रीराम अधभूत प्रकट हो गये है। इस संसार मे कोई भी पराया नही होता है। बदलने का नाम ही जगत है। कभी कभी अपने भी बदल जाये तो कभी दुखी नही होना चाहिए। यह संसार कागज की पुड़िया है जिस पर पानी की बूंद पड़ जाने से वह गल जाता है इस तरह संसार मे भी हम कागज की तरह ही है।


महाराज ने वेदो की रक्षा व गौ माता की रक्षा का वर्णन करते हुए कहा कि गौ माता के बिना कभी यज्ञ नही होता है। परमात्मा को पढाने के अवसर को ही महारामायण कहा जाता है। गुरू वशिष्ठ ने राजा दशरथ को कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म के 11 दिन बाद ही आप अपने पुत्र के दर्शन करना क्योंकि यही सही समय उचित होगा। भगवान राम के अनेक नाम है। परमात्मा की प्राप्ति ही एक हमारा उद्देश्य है। कथावाचक ने उपनिषदों की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी भी कार्य के प्रति समर्पण की भावना सर्वोपरी होती है।


आयोजन समिति के महेन्द्र लाहोरिया, सुशील बेरिवाला, नीरज गर्ग, विनोद भूटन, हनुमान सेवा समिति अध्यक्ष सत्यप्रकाश पुजारी, पूर्व अध्यक्ष यशोदानन्दन पुजारी, श्रीकिशन पुजारी, सतगुरू पुजारी, अरविन्द पुजारी, सम्पत पुजारी, विमल पुजारी, राजू स्वामी, कैलाशानन्द, प्रवीण चैधरी, महेश शर्मा, हितेश सहित सैकड़ो श्रोद्धा उपस्थित रहे।  

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