सालासर (राजस्थानलिंक.काॅम) - लक्षमणगढ रोड़ पर स्थित चमेली देवी अग्रवाल मांगलिक सभागार के पीछे अंजनी मताा मंदिर के पास अवधेशानन्द मिशन प्रभु प्रेमी संघ चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सालासर धाम मे चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा का समापन हुआ। कथा मे जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी महाराज ने गुरूवार को श्रीराम कथा के अनेक प्रसंग सुनाए। कथावाचक ने कहा कि हम परमात्मा से प्रकट हुए है हम भगवान की संतान है। भगवान भक्त के गुण देखते है बल्कि दुर्गुण नही देखते। तिरूपति बालाजी का पूर्ण नाम श्रीनिवास है। भगवान संत के माध्यम से ही भक्ति का दान करते है। अच्छे महापुरूष कभी तुरन्त जवाब नही देते बल्कि समय की प्रतीक्षा करते है।

महाराज ने सेवा सुषका का वर्णन किया। और कहा कि हमे राम राम जी बोलना चाहिए। साधु हमेशा सुबह भ्रम मुहतृ मे उठकर भगवान की साधना करते है और राम नाम का जाप करते है। भगवान श्रीराम साक्षात सत्य है। राम नाम सत्य है। वाल्मीकि के द्वारा रचित रामायण के पहले श्लोक मे पूरी रामायण का सारांश है।
कथावाचक ने लंका का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हनुमान जी महाराज ने अपनी पूंछ के आग लगाकर अशोक वाटिका को जलाकर राख कर दिया था। अरावली पर्वत माला के पत्थरो से समुन्द्र मे रामसेतू पुल बनाया गया था। राजस्थान की अरावली पर्वत माला के पत्थर धन्य है। भगवान राम के जीवन से हमे मर्यादा की शिक्षा मिलती है। भगवान राम के जीवन की आज्ञा का पालन करने वाला परिवार सभ्य समाज कहलाता है। भगवान श्रीराम अयोध्यावासियों को 14 वर्ष बाद सभी एक साथ अनेक रूप मे मिले। महाराज ने कहा कि लक्ष्मण तो भगवान शेषनाग के समान है।

इस दौरान आयोजन समिति के महेन्द्र लाहोरिया, सीमा प्रभु, राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई, पूर्व मंत्री यूनुष खान, श्रीकिशन पुजारी, सुशील बेरिवाला, भंवरलाल पुजारी, विमल पुजारी, वासुदेव पुजारी, मिठनलाल पुजारी, अरविन्द पुजारी, राकेश पुजारी, प्रथम पुजारी, नीरज गर्ग, राज स्वामी, हरिगोपाल सहित हजारो श्रोता उपस्थित रहे।