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हरि भक्त व महापुरूष का संघ ही जीवन कल्याण के साधन है - अवधेशानन्द गिरी महाराज

सालासर (राजस्थानलिंक.काॅम) - लक्षमणगढ रोड़ पर स्थित चमेली देवी अग्रवाल मांगलिक सभागार के पीछे अंजनी मताा मंदिर के पास अवधेशानन्द मिशन प्रभु प्रेमी संघ चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सालासर धाम मे चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी महाराज ने वाल्मीकि द्वारा रचित रामचरितमानस के अनेक प्रसंग सुनाए। कथा मे 151 पण्डितो ने रामचरितमानस के नवान्य पारायण का पाठ किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन महाराज ने हम भारतीय बहुत भाग्यशाली है जो कि हमारा जन्म साधु व संतो के देश मे हुआ है। पश्चिमी देशो मे सत्संग नही मिलता है। अपने जीवन को सुन्दर बनाने व प्रगति करना चाहते हो तो सत्संग करे व सत्संग सुनें। कई जन्मो की सिद्धी ही सत्संग है। हरि भक्तो का संघ व महापुरूषो का संघ ही जीवन के कल्याण के साधन है।


महाराज ने कहा कि महापुरूषो कहना है कि गुरू ऐसा ज्ञान देता है जिससे आपकी पहचान बनती है। गुरू द्धारा दिए गये ज्ञान के उपदेशो पर चलना चाहिए। महाराज ने क्रोध की परिभाषा के बारे मे बताते हुए कहा कि क्रोध एक पागलपन है, क्रोध विजातीय है। क्रोध एक घातक व हिंसक होता है। कभी भी क्रोध मे किया गया यज्ञ, पूजा व भजन कभी भी सही नही होते है। जिस दिन हम क्रोध पर नियंत्रण करे लेते उस दिन हम अच्छे मनुष्य कहलाते है। क्रोध पर नियंत्रण करने वाले मनुष्य का उद्वार करने के लिए भगवान श्रीराम स्वयं आते है। अहिल्या, द्रोपदी, कुंती, मंदोदरी व तारा इन पांच कन्याओ का नाम लेने से ही महिलाओ का कल्याण हो जाता है। गंगा माता के स्नान मे सब कर्मो का कल्याण होता है। गंगा अमृत के कारण धरती पर आई थी। गंगा एक औषद्यी है और वैद्य नारायण है। पालन पोषण करने वाली जगदम्बा होती है। 


इस दौरान आयोजन समिति के महेन्द्र लोहारिया, सुशील बेरिवाला, नीरज गर्ग, सोनीराम शर्मा, हरिहर आश्रम हरिद्वार के कैलाशनन्द महाराज, हनुमान सेवा समिति पूर्व अध्यक्ष यशोदानन्दन पुजारी, श्रीकिशन पुजारी, सम्पत पुजारी, सतगुरू पुजारी, विमल पुजारी, मनीष पुजारी, अरविन्द पुजारी, रविशंकर पुजारी सहित हजारो श्रोता उपस्थित रहे। सालासर मे आयोजित श्रीराम कथा का लाईव प्रसार संस्कार टीवी चैनेल पर प्रसारित किया जा रहा है।  

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