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श्रीमद् भागवत—मानव जीवन के कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग - मदन महाराज

सालासर (राजस्थानलिंक) - सुजानगढ के बुनकर बस्ती स्थित न्यू कॉलोनी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस पर संपूर्ण क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। गुरुवार को कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया। व्यासपीठ पर विराजित राधा रसिक महाराज मदन स्वामी ने अपने ओजस्वी वाणी से कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य चेतना है।
महाराज श्री ने कहा कि भागवत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के माध्यम से आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इसके श्रवण मात्र से मन पवित्र होता है, अहंकार का नाश होता है और जीवन में प्रेम, करुणा, सहिष्णुता व सद्भाव का संचार होता है। उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति और सत्संग के बिना मानव जीवन अधूरा है तथा भागवत कथा मनुष्य को सच्चे अर्थों में जीवन जीने की प्रेरणा देती है।


कथा के शुभारंभ से पूर्व सूर्य मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधान में सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं। डीजे पर गूंजते भजनों और जयकारों के बीच महिलाएं श्रद्धा भाव से झूमती-नाचती हुई कथा स्थल तक पहुंचीं। कलश यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति रस में डूबा नजर आया और वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर उठा।
कथा स्थल पर पंडित सुभाष दाधीच एवं गोविन्द शर्मा ने विधिविधान से भागवत की पूजा-अर्चना करवाई। यजमानों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कथा आयोजक इंद्राज स्वामी एवं उनके सुपुत्र अश्विनी स्वामी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना जागृत करना, संस्कारों को सुदृढ़ करना तथा भक्ति भाव को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि कथा के माध्यम से मानव जीवन में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक विचारों को स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कथा के प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। इस अवसर पर इंद्राज स्वामी, मधु देवी, जय श्री रामावत, कौशल्या, खुशांत, प्रथम , माधव , तिलोत्तम , देव, मीठी,दीपक स्वामी, आलोक स्वामी, प्रमोद स्वामी (खाटूश्यामजी), अर्जुन, बाबूलाल सोनी, मनोज गोदारा, हनुमानाराम तेतरवाल, भगवानाराम जांगिड़, ललित स्वामी, सुभाष सहित अनेक महिलाएं एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा का प्रथम दिवस आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति भाव और भावविभोर वातावरण के साथ संपन्न हुआ। 

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