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अन्न प्राण, विवेक व बुद्धि है - महंत दिनेशगिरि महाराज।

सालासर (राजस्थानलिंक.काॅम) - ग्राम गुडावड़ी के श्याम बाबा मंदिर मे चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन गुरूवार को कथावाचक महंत दिनेशगिरि महाराज ने भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास यात्रा का प्रसंग सुनाया। कथावाचक ने निषाद राज का राम दर्शन, नदी वर्णन, केवट का प्रेम, सीता की मुद्रिका रमा को केवट के लिए, राम और केवट के बल्लेपन की बाते व प्रेम के बारे मे श्रीराम कथा मे विस्तार से बताया।


महाराज ने कहा कि ऋषि मुनि व विज्ञान के अनुसार मनुष्य के विचारो मे अन्न का बहुत ही महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। अन्न प्राण, विवेक व बुद्धि है। भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष के वनवास के लिए प्रस्थान किया। भगवान के दर्शन करने के लिए मनुष्य का मन साफ व सुथरा होना चाहिए। महाराज ने प्रेम के बारे मे बताते हुए कहा कि प्रेम आदत, स्वभाव व प्रकृति है। माता सीता ने अपने पति भगवान श्रीराम के मन के भाव व विचार को समझकर अपनी मुद्रिका (अंगूठी) निकालकर दी और कहा कि आप यह केवट को दे दो।
इस दौरान अभीरामदास महाराज रेवासा, आयोजन कमेटी के सियाराम स्वामी, कमल पौद्यार, राजेश ढुकिया, महेन्द्र ढुकिया, ओंकारमल मेघवाल, रामावतार, महावीरप्रसाद राव, बाबूलाल पुजारी, कुन्दनमल स्वामी, भागीरथ स्वामी, दीपेन्द्र स्वामी, श्रीराम शर्मा, परमेश्वर नवहाल सहित अनेक श्रोता उपस्थित रहे। 

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