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कथा में भगवान श्री राम और भरत के मिलन का प्रसंग सुनाया।

सालासर (राजस्थानलिंक.काॅम) - ग्राम गुडावड़ी के श्याम बाबा मंदिर मे चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन शुक्रवार को कथावाचक महंत दिनेशगिरि महाराज ने भगवान राम और भरत मिलन का प्रसंग सुनाया। महाराज ने कहा कि भरत ननिहाल से आकर अपने पिता का अंतिम संस्कार कर अयोध्या से गुरु वशिष्ठ को साथ लेकर तीनों माताओं के साथ वन के लिए प्रस्थान किया। आगे निसाद राज से भेंट हुई तब ज्ञात हुआ कि भारद्वाज ऋषि के आश्रम में राम पधारे थे। ऐसा जानकर भरत ने मुनि को प्रणाम कर प्रभु श्रीराम का कुशल छेम पूछा। तब पता चला कि प्रभु चित्रकुट में कुटी बनाकर निवास कर रहे हैं।तब भरत की यात्रा चित्रकुट के लिए प्रस्थान हुई। देवताओं ने भरत की सेवा कर भक्तों का मान बढ़ाया। आगे जब श्रीराम ने भरत को देखा तो मन ही मन प्रसन्न हुए। राम और भरत का मिलन देखकर देवताएं भी पुष्प वृष्टि करने लगे। सीता ने अपनी सासू माताओं को प्रणाक कर पिता जनक से मिली। उसके बाद वशिष्ठ के चरणों की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त की। उधर भरत अयोध्या जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। राम ने बताया भरत पिता के वैकुंठ जाने पर प्रजा की रक्षार्थ आप हमारी चरण पादुकाओं को अयोध्या की राजगद्दी पर स्थापित करें। ऐसा वचन सुन भरत को संतोष हुआ। आगे पादुका सिर पर धारण कर अयोध्या पुन: वापस आ गए और नंदी गांव में कुश का आसन बिछाकर 14 वर्ष अयोध्या के प्रजा की सेवा कर अपनी रामभक्ति का अनूठा प्रदर्शन किया। इसलिए संतों ने कहा है कि बड़ा भाई हो तो श्रीराम जैसे और छोटा भाई हो तो भरत जैसे।  कलियुग में केवल प्रभु के नाम का ही सहारा है और गोमाता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है ।


आयोजन कमेटी के सदस्य सियाराम स्वामी ने बताया कि कथा के दौरान पधारे संत महात्मा राजू दास महाराज देवास , मनोहर शरण शास्त्री पलसाना, कुशाल सिंह रिंगस श्याम मंदिर का कथा के यजमान चिरंजी लाल स्वामी और आयोजन कमेटी ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
इस दौरान कथा में हनुमान सेवा समिति सालासर अध्यक्ष सत्यप्रकाश पुजारी, नानू राम पुजारी, लक्ष्मीनारायण पुजारी , रामलाल, बंशीधर , राजेश ढूकिया, रामकरण, किशोर स्वामी, अरविंद जांगिड़ अनेक श्रोता मौजूद रहे। 

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